Jainism (जैन धर्म) Complete Notes for UPSC & SSC, Other Exams

Best Jainism (जैन धर्म) notes for UPSC, SSC & Govt Exams based on Khan Sir Ancient History classes.

Jul 26, 2026 - 16:41
Updated: 6 days ago
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1. जैन धर्म in Hindi

जैन धर्म (Jainism) - सम्पूर्ण परीक्षा उपयोगी नोट्स

1. जैन धर्म की उत्पत्ति एवं परिचय 📌 UPSC / State PCS Base

  • 6वीं शताब्दी ई.पू. में भारत में कुल 72 संप्रदायों का विकास हुआ, जिनमें जैन धर्म, बौद्ध धर्म, आजीवक संप्रदाय, लिंगायत, कापालिक, शैव धर्म और वैष्णव धर्म प्रमुख हैं।
  • 'जैन' शब्द संस्कृत के 'जीन' (Jina) शब्द से बना है, जिसका अर्थ 'विजेता' होता है।
  • जैन धर्म का मुख्य केंद्र बिंदु 'अहिंसा' था।
  • जैन धर्म के प्रवर्तक को 'तीर्थंकर' कहा जाता है। तीर्थंकर का अर्थ होता है - दुःख से परे संसार रूप सागर को पार कराने वाला

2. प्रमुख तीर्थंकर और उनका योगदान 🔥 All Govt Exams (SSC, Railway, Police)

प्रथम तीर्थंकर: ऋषभदेव

  • जैन धर्म के संस्थापक ऋषभदेव थे।
  • इन्होंने हिमालय पर्वत पर निर्वाण प्राप्त किया।
  • महत्वपूर्ण: ऋग्वेद में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और 22वें तीर्थंकर अरिष्टनेमी का उल्लेख मिलता है।

23वें तीर्थंकर: पार्श्वनाथ

  • इनका जन्म वाराणसी के राजा अश्वसेन (इक्ष्वाकु वंश) के यहाँ हुआ।
  • इन्हें झारखण्ड के सम्मेद शिखर पर ज्ञान प्राप्ति हुई (इसलिए इसे पार्श्वनाथ की चोटी कहा जाता है)।
  • ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्होंने चतुरायाम धर्म दिया:
    1. सत्य (Non Lying) - सदा सत्य बोलना।
    2. अपरिग्रह (Non Possession) - किसी प्रकार का धन संग्रह नहीं करना।
    3. अस्तेय (Non Stealing) - चोरी न करना / बिना इच्छा ग्रहण न करना।
    4. अहिंसा (Non Injury) - हिंसा न करना।

3. 24वें तीर्थंकर: महावीर स्वामी (वास्तविक संस्थापक) 🎯 SSC GD/MTS/RPF/Police

तथ्य (Fact) विवरण (Description)
जन्म 540 ई.पू. वैशाली के निकट कुंडग्राम में।
बचपन का नाम वर्धमान
पिता एवं माता पिता सिद्धार्थ (ज्ञात्रिक कुल के राजा)। माता त्रिशला (लिच्छवी नरेश चेटक की बहन)।
पत्नी एवं पुत्री पत्नी: यशोदा। पुत्री: प्रियदर्शनी (अनोज्जा) (दामाद: जमालि)।
गृह त्याग 30 वर्ष की आयु में बड़े भाई नंदीवर्धन से आज्ञा लेकर।
ज्ञान प्राप्ति (कैवल्य) 12 वर्ष की कठोर तपस्या के बाद जृम्भिक ग्राम में ऋजुपालिका नदी के तट पर साल वृक्ष के नीचे। (ज्ञान प्राप्ति को 'कैवल्य' कहते हैं)।
उपाधियाँ ज्ञान प्राप्ति के बाद इन्हें केवलीन, जीन (विजेता) और निग्रंथ (बंधन मुक्त) कहा गया।
प्रथम उपदेश राजगीर में वितुलाचल पहाड़ी पर बराकर नदी के तट पर प्राकृत (अर्द्धमागधी) भाषा में। (अंतिम उपदेश पावापुरी में दिया)।
प्रथम शिष्य प्रथम शिष्य दामाद जमालि। प्रथम जैन भिक्षुणी चम्पा थी (राजा दधीवाहन की बहन)।
मृत्यु (निर्वाण) 72 वर्ष की अवस्था में 468 ई.पू. पावापुरी में मल्ल राजा सुस्तिपाल (राजा हस्तिपाल) के अधीन।

💡 महत्वपूर्ण भौगोलिक पहचान: वर्तमान में जृम्भिक ग्राम की पहचान हजारीबाग के समीप पारसनाथ की पहाड़ी तथा ऋजुपालिका नदी की पहचान दामोदर नदी की सहायक नदी बराकर नदी के रूप में की जाती है।

4. जैन धर्म के प्रमुख सिद्धांत एवं दर्शन 📌 UPSC/BPSC/UPPCS Mains & Prelims

  • पंचायन धर्म (Five Vows): ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी ने चतुरायाम में 'ब्रह्मचर्य' जोड़कर इसे पंचायन धर्म बना दिया। (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य)
  • त्रिरत्न (Three Jewels): महावीर स्वामी ने त्रिरत्न दिए: 1. सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge), 2. सम्यक् दर्शन (Right Belief), 3. सम्यक् आचरण (Right Action)
  • जैन धर्म की पाँच श्रेणियाँ: 1. तीर्थंकर (मोक्ष प्राप्त), 2. अर्हत (निर्वाण की ओर अग्रसर), 3. आचार्य (भिक्षुओं के प्रमुख), 4. उपाध्याय (शिक्षक), 5. साधु (सारे जैन-भिक्षु)।
  • अनीश्वरवादी दर्शन: महावीर स्वामी ने ईश्वर के अस्तित्व को नहीं माना। मूर्तिपूजा और कर्मकांड का विरोध किया। अतः जैन धर्म अनीश्वरवादी है।
  • पुनर्जन्म और आत्मा: इन्होंने पुनर्जन्म को माना और पुनर्जन्म का सबसे बड़ा कारण 'आत्मा' को बताया। आत्मा को सताने के लिए इन्होंने कहा कि मोक्ष प्राप्ति के बाद पुनर्जन्म से मुक्ति मिल जाएगी।
  • अहिंसा पर अत्यधिक बल: इस कारण इन्होंने कृषि तथा युद्ध पर प्रतिबंध लगा दिया।
  • जैन दर्शन से संबंधित महत्वपूर्ण शब्द: स्यादवाद, अनेकांतवाद, सप्त्भंगी ज्ञान, जीन, निग्रंथ, तीर्थंकर, कैवल्य, और अणुव्रत सिद्धांत। (यह सीधे UPSC/PCS में पूछे जाते हैं)।

5. जैन संघ, विभाजन और जैन संगीतियाँ (Councils) 🔥 All State PCS & CGL

  • महावीर ने अपने अनुयायियों के लिए एक संघ की स्थापना की जिसमें 11 अनुयायी थे (इन्हें गणधर कहा जाता था)।
  • महावीर के बाद प्रथम उपदेश देने वाला आर्यसुधर्मा था।
  • भद्रबाहु तथा स्थूलभद्र इनके दो सबसे प्रिय अनुयायी थे।
  • विभाजन की कहानी: मौर्य काल में मगध पर 12 वर्षीय भीषण अकाल पड़ा। भद्रबाहु अपने शिष्यों के साथ दक्षिण भारत (कर्नाटक) चले गए। इन्हीं के साथ चन्द्रगुप्त मौर्य भी आये थे, जिसने श्रवणबेलगोला में संलेखना (संथारा) विधि से प्राण त्याग दिए। अकाल ख़त्म होने पर भद्रबाहु मगध लौटे, लेकिन स्थूलभद्र के साथ उनका विवाद हो गया।
    👉 भद्रबाहु के अनुयायी: दिगम्बर (नग्न रहने वाले)।
    👉 स्थूलभद्र के अनुयायी: श्वेताम्बर (श्वेत वस्त्र धारण करने वाले)।
संगीति (Council) समय / स्थान अध्यक्ष परिणाम / कार्य
पहली जैन संगीति 300 ई.पू. / पाटलिपुत्र स्थूलभद्र भद्रबाहु ने 12 अंग नामक पुस्तक की रचना की। (नोट: दक्षिणी जैन दिगम्बर ने इसका बहिष्कार किया)
द्वितीय जैन संगीति 6ठी शताब्दी / वल्लभी (गुजरात) देवाधिक्षमाश्रमण इसमें 12 उपांग की रचना की गई।

6. श्वेतांबर एवं दिगम्बर में अंतर

श्वेतांबर (Shvetambara) दिगम्बर (Digambara)
1. इसे स्थूलभद्र ने प्रारम्भ किया। 1. इसे भद्रबाहु ने प्रारम्भ किया।
2. ये सफ़ेद वस्त्र पहनते थे। 2. ये निर्वस्त्र रहते थे।
3. महिलाओं को मोक्ष मिल सकता है। 3. महिलाओं को मोक्ष नहीं मिल सकता है।
4. 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ महिला थी। 4. 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ पुरुष थे।
5. इसके अनुसार महावीर स्वामी विवाहित थे। 5. इसके अनुसार महावीर स्वामी अविवाहित थे।

7. जैन साहित्य एवं ग्रंथ (Jain Literature)

  • जैन साहित्य को 'आगम' (Agam) कहते हैं।
  • महावीर स्वामी के दिए गए उपदेशों को '14 पूर्वा' नामक पुस्तक में रखा गया है (सबसे प्राचीन जैन पुस्तक)।
  • जैन भिक्षु के निवास को 'वसदे' (Basadi) कहा गया है।
  • जैन तीर्थंकरों की जीवनी भद्रबाहु द्वारा रचित 'कल्पसूत्र' में है (यह संस्कृत भाषा में है)।
  • महावीर के धार्मिक उपदेशों का संकलन पूर्वा नामक पुस्तक में है।
  • प्रमुख जैन ग्रंथ (प्राकृत भाषा में): 12 अंग, 12 उपांग, अचरांग सूत्र, भगवति सूत्र, कल्पसूत्र, आदि-पुराण।
    • अचरांग सूत्र: इनमें जैन भिक्षुओं के आचार नियम व विधि निषेधों का विवरण है।
    • भगवति सूत्र: इसमें महावीर के जीवन की चर्चा है।
    • न्यायधम्मकहा सूत्र: महावीर की शिक्षाओं का संग्रह।

8. प्रमुख जैन मंदिर एवं स्थापत्य (Temples & Art) 🎯 Art & Culture Special

  1. मौर्यकाल: मथुरा जैन धर्म का प्रमुख केंद्र था। (मथुरा कला का संबंध जैन, बौद्ध और हिन्दू धर्म से है)।
  2. कर्नाटक: चामुंड शासकों ने गोमतेश्वर (बाहुबली) का जैन मंदिर बनवाया।
  3. मध्य प्रदेश (खजुराहो): चंदेल शासकों ने खजुराहो में जैन मंदिर बनवाया (पार्श्वनाथ व आदिनाथ/बाहुबली की मूर्ति)। नोट: खजुराहो हिन्दू और जैन दोनों का पवित्र स्थल है, जबकि अजंता बौद्ध, जैन और हिन्दू तीनों का।
  4. राजस्थान (माउंट आबू): दिलवाड़ा का प्रसिद्ध जैन मंदिर। (विमलशाह के सामंत वास्तुपाल तथा तेजपाल द्वारा निर्मित)।
  5. अन्य: प्रसिद्ध जलमंदिर (पावापुरी, बिहार) तथा जैन मंदिर हाथी सिंह (गुजरात) में स्थित है।

9. प्रमुख जैन तीर्थंकर एवं उनके प्रतीक चिन्ह (Symbols) 🎯 SSC / Railway / Police Match the Following

क्र.सं. प्रमुख जैन तीर्थंकर चिन्ह (Symbol)
1. ऋषभदेव बैल (Bull)
2. अजितनाथ हाथी (Elephant)
3. संभवनाथ अश्व (Horse)
6. पद्मप्रभ कमल (Lotus)
7. सुपार्श्वनाथ स्वास्तिक (Swastika)
19. मल्लिनाथ कलश (Kalash)
21. नेमिनाथ नीलकमल (Blue Lotus)
22. अरिष्टनेमि शंख (Conch)
23. पार्श्वनाथ सर्प (Snake)
24. महावीर स्वामी सिंह (Lion)

10. महत्वपूर्ण तथ्य एवं जैन धर्म के पिछड़ने के कारण

  • ✅ महावीर के समकालीन शासक: बिम्बिसार, चन्द्रप्रद्योत, अजातशत्रु, दधिवाहन तथा चेटक थे। (अन्य प्रमुख राजा- उदयन, खारवेल, राष्ट्रकूट, अमोघवर्ष, चंदेल)।
  • ✅ जैन धर्म व्यापारिक वर्ग के बीच अधिक फैला था।
  • "जियो और जीने दो" (Live and let live) महावीर स्वामी का कथन है।
  • ✅ जैन धर्म को अंतिम राजकीय संरक्षण गुजरात के चालुक्य वंश के राजाओं ने दिया।
  • ✅ महावीर एक गाँव में 1 दिन से अधिक तथा एक शहर में 5 दिन से अधिक नहीं रहते थे।

📉 जैन धर्म के पिछड़ने (पतन) के मुख्य कारण:

  1. कठिन भाषा (प्राकृत)
  2. कठोर नियम
  3. महिलाओं का बराबरी न होना
  4. राजाओं का संरक्षण न प्राप्त होना
  5. निर्वस्त्र रहना
  6. ब्रह्मचर्य रहना

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