प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) Complete Notes

​प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period) complete notes in Hindi & English. Best for UPSC, SSC & PCS.

Jul 01, 2026 - 10:26
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प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Period)

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📌 Is Notes Me Kya Khaas Hai?

Is single post me humne Pura-pashan, Madhya-pashan, Nav-pashan, Tamra-pashan aur Maha-pashan kal ke har us chhote-bade tathya ko cover kiya hai jo bade se bade exams me puche jaate hain. Saath hi sath mahatvapurna sthalon ki ek exhaustive master table bhi add ki gayi hai.

📊 इतिहास का वर्गीकरण (Classification Graph)

इतिहास (History)
1. प्रागैतिहासिक काल
(Prehistoric)

(लिखित साक्ष्य उपलब्ध नहीं)
2. आद्य-ऐतिहासिक काल
(Proto-Historic)

(लिखित हैं, पर पढ़े नहीं गए)
3. ऐतिहासिक काल
(Historical Period)

(लिखित और पठनीय स्रोत उपलब्ध)
👇 प्रागैतिहासिक काल (पाषाण काल) का आंतरिक विभाजन 👇
पुरापाषाण काल
(20L BC - 12000 BC)
मध्यपाषाण काल
(12000 BC - 10000 BC)
नवपाषाण काल
(10000 BC - 3000 BC)
ताम्रपाषाण काल
(Stone-Copper Age)

📖 इतिहास के बुनियादी सिद्धांत एवं स्रोत

मानव सभ्यता के क्रमिक विकास की कहानी को समझने के लिए इतिहास को तीन बड़े कालखंडों में विभाजित किया जाता है। पुरातत्वविद् क्रिश्चियन थॉमसन (Christian Thomsen) ने धातुओं की उपलब्धता के आधार पर संपूर्ण इतिहास को त्रियुगीन प्रणाली (पाषाण, कांस्य और लौह युग) में विभाजित किया था, जबकि जॉन लुबाक ने इसे लेखन और साहित्यिक साक्ष्यों के आधार पर वर्गीकृत किया।

🚨 EXAM ALERT: यहाँ से सीधे प्रश्न बनते हैं!

  1. इतिहास के जनक: यूनान के प्रसिद्ध इतिहासकार 'हेरोडोटस' (Herodotus) को इतिहास का पिता माना जाता है।
  2. भारतीय पुरातत्व के पिता: अलेक्जेंडर कनिंघम (Alexander Cunningham) को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का जनक माना जाता है।
  3. भारत में प्रथम खोज: वर्ष 1863 में भूवैज्ञानिक और पुरातत्वविद् रॉबर्ट ब्रूस फुट (Robert Bruce Foote) ने मद्रास के निकट 'पल्लवरम' नामक स्थान पर भारत के पहले पाषाण कालीन उपकरण (कुल्हाड़ी/Handaxe) की खोज की थी।
  4. राष्ट्रीय संग्रहालय: मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित 'इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय' भारत का सबसे अनूठा संग्रहालय है, जो भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।
  5. मानव उत्पत्ति का केंद्र: मानव जाति का उद्गम स्थल या पालना अफ्रीका महाद्वीप को माना जाता है, जबकि नागरिक सभ्यता का क्रमिक विकास एशिया महाद्वीप में हुआ।

1. पुरापाषाण काल (Palaeolithic Period)

समय अवधि: लगभग 20 लाख वर्ष पूर्व से 12,000 ईसा पूर्व (20 Lakh BC to 12000 BC)

यह मानव इतिहास का सबसे प्रारंभिक और सबसे लंबा युग था, जो भूवैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत नूतन काल यानी प्लिस्टोसीन (Pleistocene Epoch) से संबंधित है। इस युग में पृथ्वी पूरी तरह बर्फ से ढकी हुई थी। इस काल का मानव पूरी तरह बर्बर और आदिम था।

💡 मुख्य जीवन शैली एवं विशेषताएँ:

  • खाद्य संग्राहक और शिकारी: इस समय का मनुष्य उत्पादक नहीं बल्कि उपभोक्ता था। वह केवल जंगली जानवरों का शिकार (Hunting) करता था और कंदमूल इकट्ठा करके अपना पेट भरता था। उसका जीवन पूरी तरह 'खानाबदोश' (Nomadic) था।
  • आग का आविष्कार: पुरापाषाण काल की सबसे युगांतकारी घटना 'आग की खोज' थी, हालांकि इस काल में मानव आग के नियंत्रित उपयोग से पूरी तरह परिचित नहीं हो पाया था।
  • औजारों की प्रकृति: इस काल के औजार बड़े, अनगढ़ और बेडौल पत्थरों से बने होते थे, जिन्हें मुख्य रूप से क्वार्ट्जाइट (Quartzite), फ्लिंट और जैस्पर पत्थरों से तैयार किया जाता था।

📊 पुरापाषाण काल का तीन भागों में सूक्ष्म वर्गीकरण (Exhaustive Analysis):

  • A. निम्न पुरापाषाण काल (Lower Palaeolithic): इस काल में मुख्य रूप से चॉपर-चॉपिंग और पेबुल (Pebble) उपकरणों का उपयोग होता था। पाकिस्तान की सोहन नदी घाटी (सोहन संस्कृति) और बेलन घाटी इसके प्रमुख उदाहरण हैं। बेलन घाटी से ही मातृदेवी की हड्डी से बनी प्राचीनतम मूर्ति मिली है।
  • B. मध्य पुरापाषाण काल (Middle Palaeolithic): इस काल में औजार पत्थरों की पपड़ी या फलक से बनने लगे थे, जिसके कारण इसे 'फलक संस्कृति' (Flake Culture) भी कहा जाता है। महाराष्ट्र का नेवासा इसका सबसे प्रमुख केंद्र माना जाता है।
  • C. उच्च पुरापाषाण काल (Upper Palaeolithic): इस कालखंड में जलवायु गर्म होने लगी थी और आधुनिक मानव (Homo Sapiens) का उदय इसी समय हुआ। इस काल के प्रमुख औजार ब्लेड (Blade) और ब्यूरिन थे। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित भीमबेटका (Bhimbetka) की गुफाओं में इसी काल की शानदार शैलचित्रकारी (Rock Paintings) देखने को मिलती है।

2. मध्यपाषाण काल (Mesolithic Period)

समय अवधि: 12,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व (12000 BC to 10000 BC)

यह काल पुरापाषाण काल और नवपाषाण काल के मध्य एक **संक्रमण कालीन युग (Transitional Phase)** था। इस काल में जलवायु में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए और वर्तमान भूवैज्ञानिक युग होलोसीन (Holocene) की शुरुआत हुई, जिससे बर्फ पिघली और घास के मैदानों का विकास हुआ। भारत में इस काल के बारे में सर्वप्रथम जानकारी 1867 ई. में **सी.एल. कार्लाइल (C.L. Carlleyle)** ने विंध्य क्षेत्र से लघु पाषाण उपकरण खोजकर दी थी।

💡 मुख्य जीवन शैली एवं विशेषताएँ:

  • माइक्रोलिथ (Microlithic Tools): इस काल में पत्थरों के औजारों का आकार बहुत छोटा (1 से 5 सेंटीमीटर तक) हो गया था। इन्हें बेहद सूक्ष्म और नुकीले रूप में ढाला जाता था, इसलिए इस युग को 'लघु पाषाण उपकरण युग' (Microlith Age) कहा जाता है।
  • पशुपालन का प्रारंभ: मानव इतिहास में **पशुपालन (Animal Husbandry)** की शुरुआत इसी मध्यपाषाण काल में हुई थी। मनुष्य द्वारा पालतू बनाया गया सबसे पहला पशु 'कुत्ता' (Dog) था।
  • अंत्येष्टि संस्कार: मानव के व्यवस्थित दाह-संस्कार या अंतिम संस्कार (Funeral rites) के पहले स्पष्ट साक्ष्य इसी काल से मिलने शुरू होते हैं।
📍 मध्यपाषाण काल के सबसे महत्वपूर्ण स्थल:
  • आदमगढ़ (मध्य प्रदेश) और बागोर (राजस्थान): इन दोनों स्थानों से पशुपालन के सबसे प्राचीन और प्रामाणिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। बागोर भारत का सबसे बड़ा मध्यपाषाणिक स्थल है।
  • सराय नाहर राय और महदहा (उत्तर प्रदेश): प्रतापगढ़ जिले में स्थित इन स्थलों से बड़ी मात्रा में मानव कंकाल (अस्थिपंजर) और गर्त-चूल्हे मिले हैं। यहाँ से एक ही कब्र में कई शवों को एक साथ दफनाने के साक्ष्य भी मिले हैं।
  • दमदमा (उत्तर प्रदेश): यहाँ से एक ही कब्र में तीन मानव कंकाल एक साथ दफनाए हुए मिले हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य है।

3. नवपाषाण काल (Neolithic Period)

समय अवधि: 10,000 ईसा पूर्व से 3,000 ईसा पूर्व (10000 BC to 3000 BC)

प्रसिद्ध इतिहासकार वी. गॉर्डन चाइल्ड ने इस कालखंड में हुए महान परिवर्तनों के कारण इसे **'नवपाषाण कालीन क्रांति' (Neolithic Revolution)** की संज्ञा दी थी। इस युग में मानव शिकारी से पूरी तरह **'खाद्य उत्पादक' (Food Producer)** बन गया और उसने प्रकृति पर विजय पानी शुरू कर दी। भारत में इस काल के साक्ष्यों की खोज सबसे पहले 1860 ई. में ले मेसूरियर (Le Mesurier) ने टोंस नदी घाटी में की थी।

💡 मुख्य जीवन शैली एवं विशेषताएँ:

  • कृषि का व्यवस्थित विकास: मानव ने बड़े पैमाने पर खेती करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उगाई गई फसलों में गेहूं (Wheat) और जौ (Barley) शामिल थे।
  • स्थायी सामाजिक जीवन: कृषि की देखरेख के लिए मानव ने एक स्थान पर टिककर रहना शुरू किया, जिससे 'स्थायी बस्तियों' (Permanent Settlements) और गांवों का निर्माण हुआ।
  • पहिए का आविष्कार: भारी सामान को ढोने और मिट्टी के बर्तन (मृदभांड) बनाने के लिए पहिए (Wheel) का आविष्कार इस युग की सबसे बड़ी तकनीकी खोज थी।
  • पॉलिशदार औजार: इस काल के औजार अत्यधिक चिकने, धारदार और पॉलिश किए हुए होते थे। मुख्य रूप से पत्थर की कुल्हाड़ियों का उपयोग किया जाता था।

🎯 नवपाषाण काल के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल (Direct Questions):

  • मेहरगढ़ (बलूचिस्तान, वर्तमान पाकिस्तान): यह सिंधु नदी के पश्चिम में स्थित है। यहाँ से मानव इतिहास में **कृषि के सबसे प्राचीनतम साक्ष्य (लगभग 7000 ई.पू.)** मिले हैं, जहाँ गेहूं और जौ की खेती की जाती थी। यहाँ से स्थायी जीवन और कच्ची ईंटों के आयताकार घरों के अवशेष भी मिले हैं। इसे बलूचिस्तान की 'रोटी की टोकरी' भी कहा जाता है।
  • लहुरादेव (संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश): नवीनतम पुरातात्विक खोजों के अनुसार, यहाँ से 9000 ई.पू. से 7000 ई.पू. के बीच चावल की खेती के सबसे प्राचीन साक्ष्य मिले हैं। इस खोज ने मेहरगढ़ के प्राचीनतम रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है।
  • कोल्डिहवा (इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश): बेलन नदी के तट पर स्थित इस स्थल से लगभग 6000 ई.पू. के धान (चावल) की खेती के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं।
  • बुर्जहोम (श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर): इसका अर्थ होता है 'भूर्ज वृक्ष का स्थान'। यहाँ के लोग जमीन के नीचे गड्ढे बनाकर रहते थे, जिन्हें 'गर्तवास' (Pit-dwellings) कहा जाता है। यहाँ की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि खबरों में मालिक के शव के साथ उसके पालतू कुत्ते को भी दफनाने का साक्ष्य मिला है।
  • गुफकराल (जम्मू-कश्मीर): इसका शाब्दिक अर्थ 'कुम्हार की गुफा' (Cave of the Potter) होता है। यहाँ से कृषि, पशुपालन और हड्डी के बने सुई जैसे अनेक उपकरण मिले हैं।
  • चिरांद (सारण जिला, बिहार): गंगा नदी के उत्तर में स्थित इस स्थल से नवपाषाण काल के भारी मात्रा में हड्डी से बने उपकरण और औजार मिले हैं, जो मुख्य रूप से हिरण के सींगों (Antlers) से निर्मित थे।

4. ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Period)

नवपाषाण काल के अंत में पत्थरों के साथ-साथ धातुओं का उपयोग शुरू हुआ। मानव द्वारा खोजी और उपयोग की गई **सबसे पहली धातु 'तांबा' (Copper)** थी। पत्थर (Lithic) और तांबे (Chalco) के इस संयुक्त प्रयोग के कारण ही इस काल को ताम्रपाषाणिक काल (Chalcolithic Age) या कैल्कोलिथिक युग कहा जाता है। यह मूल रूप से एक **ग्रामीण कृषक संस्कृति** थी, जिसने आगे चलकर सिंधु घाटी की शहरी कांस्य युगीन सभ्यता के लिए आधार तैयार किया।

💡 प्रमुख क्षेत्रीय ताम्रपाषाणिक संस्कृतियाँ (Regional Cultures):

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस काल में विशिष्ट संस्कृतियों का विकास हुआ, जिनके मृदभांड (मिट्टी के बर्तन) और रहन-सहन अलग थे:

  • आहार या बनास संस्कृति (राजस्थान): उदयपुर के पास स्थित आहार स्थल को प्राचीन काल में 'ताम्बवती' (तांबे वाली जगह) कहा जाता था क्योंकि यहाँ बड़े पैमाने पर तांबा गलाने की भट्टियां और कारखाने मिले हैं। यहाँ का प्रमुख केंद्र 'गिलुंड' था, जहाँ पकी हुई ईंटों के साक्ष्य मिले हैं।
  • मालवा संस्कृति (मध्य प्रदेश): मालवा संस्कृति अपने उत्कृष्ट प्रकार के मृदभांडों (Pottery) के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है। इस संस्कृति का सबसे महत्वपूर्ण स्थल नवदाटोली (Navdatoli) है, जिसका उत्खनन प्रोफेसर एच.डी. सांकलिया ने कराया था। यहाँ से भारत में सबसे बड़ी संख्या में अनाजों (गेहूं, अलसी, मसूर, मटर) के ढेर मिले हैं।
  • कायथा संस्कृति (मध्य प्रदेश): चंबल नदी घाटी में स्थित यह संस्कृति हड़प्पा सभ्यता की समकालीन मानी जाती है। यहाँ के घरों से तांबे के कंगन और मूल्यवान पत्थरों के हार मिले हैं।
  • जोर्वे संस्कृति (महाराष्ट्र): पश्चिमी महाराष्ट्र में फैली यह संस्कृति सबसे विस्तृत थी। इसके प्रमुख स्थलों में दैमाबाद, इनामगाँव और नेवासा शामिल हैं।
    ▪️ दैमाबाद (Daimabad): यहाँ से तांबे की बनी ठोस वस्तुएं जैसे 'तांबे का रथ' (Copper Chariot), हाथी, गैंडा और भैंसे की आकृतियां मिली हैं।
    ▪️ इनामगाँव (Inamgaon): यह ताम्रपाषाण काल की सबसे बड़ी किलेबंद बस्ती थी, जहाँ से मातृदेवी की मूर्तियां और बड़े-बड़े अन्नागार (Granaries) मिले हैं।

5. महापाषाण काल (Megalithic Culture)

दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल) में नवपाषाण काल के समापन के बाद जिस संस्कृति का उदय हुआ, उसे **महापाषाण काल (Megalithic Age)** कहते हैं। इस काल के लोग अपने मृतकों के शवों को दफनाने के बाद, उस कब्र के चारों तरफ बहुत विशाल और बड़े-बड़े पत्थरों के घेरे (Megaliths) बना देते थे ताकि स्मारक की पहचान की जा सके। यह संस्कृति मुख्य रूप से लोहे के हथियारों के उपयोग और काले-लाल मिट्टी के बर्तनों (Black and Red Ware) से जुड़ी हुई थी। प्रमुख स्थलों में *ब्रह्मगिरि, मासकी और आदिचनल्लूर* शामिल हैं।

📊 अल्टीमेट मास्टर टेबल: पाषाण काल के प्रमुख स्थल एवं महत्वपूर्ण साक्ष्य

ऐतिहासिक कालखंड प्रमुख पुरातात्विक स्थल वर्तमान भौगोलिक स्थिति प्राप्त महत्वपूर्ण साक्ष्य (Exam VVI)
पूरापाषाण काल (Paleolithic) भीमबेटका (Bhimbetka) रायसेन जिला, मध्य प्रदेश मानव द्वारा बनाई गई प्राचीनतम गुफा चित्रकारी (Rock Shell-art), यहाँ 500 से अधिक चित्रित गुफाएं हैं।
पल्लवरम (Pallavaram) चेन्नई, तमिलनाडु रॉबर्ट ब्रूस फुट द्वारा खोजा गया भारत का पहला पत्थर का हैंडेक्स (Hand-axe/कुल्हाड़ी)
हथनोरा (Hathnora) नर्मदा घाटी, मध्य प्रदेश भारत में सबसे पहले 'मानव खोपड़ी' (Human Skull) का जीवाश्म यहीं से मिला था।
मध्यपाषाण काल (Mesolithic) बागोर (Bagor) & आदमगढ़ राजस्थान एवं मध्य प्रदेश मानव इतिहास में पशुपालन (Animal Domestication) की शुरुआत के सबसे प्राचीनतम साक्ष्य।
महदहा & सराय नाहर राय प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश हड्डी के बने आभूषण, गर्त चूल्हे और मानव कंकाल (अस्थिपंजर) के प्राथमिक अवशेष।
नवपाषाण काल (Neolithic) मेहरगढ़ (Mehrgarh) बलूचिस्तान, पाकिस्तान कृषि (गेहूं और जौ) का प्राचीनतम साक्ष्य, स्थायी बस्तियां तथा मिट्टी की कच्ची ईंटों के घर।
बुर्जहोम (Burzahom) श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर गर्तवास (जमीन के अंदर गड्ढा घर) तथा मालिक के शव के साथ कुत्ते को दफनाने की अनूठी प्रथा।
कोल्डिहवा (Coldihwa) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश विश्व में धान या चावल (Rice) की खेती का सबसे पहला और प्राचीनतम प्रमाण (6000 BC)।
चिरांद (Chirand) सारण, बिहार प्रचुर मात्रा में हिरण के सींगों से बने हड्डी के उपकरण और औजार।
ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic) नवदाटोली (Navdatoli) नर्मदा तट, मध्य प्रदेश ताम्रपाषाण काल का सबसे विस्तृत उत्खनित स्थल, जहाँ से विभिन्न प्रकार के अनाजों के विशाल भंडार मिले हैं।
दैमाबाद (Daimabad) अहमदनगर, महाराष्ट्र भारी मात्रा में तांबे की वस्तुएं, जिसमें सबसे प्रसिद्ध 'तांबे का भारी रथ' (Copper Chariot) शामिल है।
इनामगाँव (Inamgaon) पुणे, महाराष्ट्र ताम्रपाषाण युग की सबसे बड़ी किलेबंद और खाई से घिरी ग्रामीण बस्ती, मातृदेवी की मूर्ति।

📝 Studyquell Note to Students: प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric Age) मानव विकास की नींव है। इस आर्टिकल में दी गई जानकारी को कंठस्थ कर ले। ऑल द बेस्ट फॉर योर एग्जाम्स!

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